अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला – Ayodhya में राम मंदिर विवाद पर Supreme court का फैसला कल यानी शनिवार को आएगा। निर्णय को देखते हुए न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देश के कई हिस्सों में सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर पूरी Ayodhya नगरी को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। निर्णय को लेकर प्रशासन जहां मुस्तैद है तो वहीं लोगों में इस बात को लेकर कौतूहल है कि निर्णय उनके पक्ष में नहीं आया तो आगे का रास्ता क्या होगा। क्या होगा अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला।

Supreme court के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में 5 सदस्यीय बेंच ने लगातार 40 दिनों तक सुनवाई की। जस्टिस रंजन गोगोई की इस बेंच में उनके अलावा जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर भी शामिल रहे। बेंच ने मामले की सुनवाई 6 अगस्त से शुरू की और सुनवाई रोजाना चली, अब सभी को निर्णय का इंतजार है।

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Supreme court राम मंदिर विवाद पर कुछ भी फैसला दे सकता है, ऐसे में आगे की स्थिति क्या होगी। क्या यह अंतिम फैसला होगा और सभी पक्षों को इस निर्णय पर रजामंदी देनी होगी। क्या होगा अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला।

रिव्यू पीटिशन का होगा मौका

Court के निर्णय के बाद हर पक्ष के पास पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) डालने का मौका रहेगा। कोई भी पक्षकार निर्णय को लेकर Supreme court से पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है जिस पर बेंच सुनवाई कर सकती है। हालांकि Court को यह तय करना होगा कि वह पुनर्विचार याचिका को Court में सुने या फिर चैंबर में सुने।

बेंच अपने स्तर पर ही इस याचिका को खारिज कर सकती है या फिर इससे ऊपर के बेंच को स्थानांतरित कर सकती है। हालांकि Court के निर्णय के अब तक के इतिहास बताते हैं कि बेंच अपने स्तर पर ही याचिका पर फैसला ले लेता है।

क्या है क्यूरेटिव पिटीशन 

Supreme court की ओर से पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाए जाने के बाद भी पक्षकारों के पास एक और विकल्प होगा। Court के निर्णय के खिलाफ यह दूसरा और अंतिम विकल्प है जिसे क्यूरेटिव पिटीशन (उपचार याचिका) कहा जाता है।

हालांकि क्यूरेटिव पिटीशन पुनर्विचार याचिका से थोड़ा अलग है, इसमें निर्णय की जगह मामले में उन मुद्दों या विषयों को चिन्हित करना होता है जिसमें उन्हें लगता है कि इन पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। इस क्यूरेटिव पिटीशन पर भी बेंच सुनवाई कर सकता है या फिर उसे खारिज कर सकता है। इस स्तर पर फैसला होने के बाद केस खत्म हो जाता है और जो भी निर्णय आता है वही सर्वमान्य हो जाता है।

क्या था High Court का फैसला

Allahabad High Court की 3 जजों की बेंच ने करीब 9 साल पहले 30 सितंबर, 2010 को अपने निर्णय में कहा था कि 2।77 एकड़ की विवादित जमीन को तीनों पक्षों (सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान) में बराबर-बराबर बांट दिया जाए।

हालांकि High Court इस निर्णय को किसी भी पक्ष ने नहीं माना और इसके खिलाफ Supreme court में चुनौती दी गई। Supreme court की ओर से 9 मई 2011 को Allahabad High Court के निर्णय पर रोक लगा दी गई। क्या होगा अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला।

25 बड़ी बातें अयोध्या विवाद पर अब तक क्या-क्या हुआ

  • सवा सौ साल पहले हुए मंदिर मस्जिद झगड़े के पहले बाबरी मस्जिद के दरवाजे के पास बैरागियों ने एक चबूतरा बना रखा था। 1885 में महंत रघुबर दास ने अदालत से मांग की कि चबूतरे पर मंदिर बनाने की इजाजत दी जाए। यह मांग खारिज हो गई।
  • 1946 में विवाद उठा कि बाबरी मस्जिद शियाओं की है या सुन्नियों की। निर्णय हुआ कि बाबर सुन्नी की था इसलिए सुन्नियों की मस्जिद है।
  • 1949: जुलाई में प्रदेश सरकार ने मस्जिद के बाहर राम चबूतरे पर राम मंदिर बनाने की कवायद शुरू की। लेकिन यह भी नाकाम रही।
  • और 1949 में ही 22-23 दिसंबर को मस्जिद में राम सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां रख दी गईं।
  • 1949 : 29 दिसंबर को यह संपत्ति कुर्क कर ली और वहां रिसीवर बिठा दिया गया।
  • 1950 से इस जमीन के लिए अदालती लड़ाई का एक नया दौर शुरू होता है। इस तारीखी मुकदमे में जमीन के सारे दावेदार 1950 के बाद के हैं।
  • 1950 : 16 जनवरी को गोपाल दास विशारत अदालत गए। कहा कि मूर्तियां वहां से न हटें और पूजा बेरोकटोक हो। अदालत ने कहा कि मूर्तियां नहीं हटेंगी, लेकिन ताला बंद रहेगा और पूजा सिर्फ पुजारी करेगा। जनता बाहर से दर्शन करेगी।
  • 1959 : निर्मोही अखाड़ा अदालत पहुंचा और वहां अपना दावा पेश किया।
  • 1961 : सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड अदालत पहुंचा। मस्जिद का दावा पेश किया।
  • 1986 : 1 फरवरी को फैजाबाद के जिला जज ने जन्मभूमि का ताला खुलवा के पूजा की इजाजत दे दी।
  • 1986 : Court के इस फैसले के खिलाफ बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाने का निर्णय हुआ।
  • 1989 : वीएचपी नेता देवकीनंदन अग्रवाल ने रामलला की तरफ से मंदिर के दावे का मुकदमा किया।
  • 1989 : नवंबर में मस्जिद से थोड़ी दूर पर राम मंदिर का शिलान्यास किया गया।
  • 25 सितंबर 1990 को बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से एक रथ यात्रा शुरू की। इस यात्रा को अयोध्या तक जाना था। इस रथयात्रा से पूरे मुल्क में एक जुनून पैदा किया गया। इसके नतीजे में गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गए। ढेरों इलाके कर्फ्यू की चपेट में आ गए। लेकिन आडवाणी को 23 अक्टूबर को बिहार में लालू यादव ने गिरफ्तार करवा लिया।
  • 1990 : कारसेवक मस्जिद के गुम्बद पर चढ़ गए और गुम्बद तोड़ा। वहां भगवा फहराया। इसके बाद दंगे भड़क गए।
  • 1991 : जून में आम, चुनाव हुए और यूपी में बीजेपी की सरकार बन गई।
  • 1992 : 30-31 अक्टूबर को धर्म संसद में कारसेवा की घोषणा हुई।
  • 1992 : नवंबर में कल्याण सिंह ने अदालत में मस्जिद की हिफाजत करने का हलफनामा दिया।
  • लेकिन 6 दिसंबर 1992 को लाखों कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद गिरा दी। कारसेवक 11 बजकर 50 मिनट पर मस्जिद के गुम्बद पर चढ़े। करीब 4।30 बजे मस्जिद का तीसरा गुम्बद भी गिर गया।
  • इस घटना के बाद मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जिन्होंने अदालत में हलफानामा देकर मस्जिद की हिफाजत की जिम्मेदारी ली थी, अपनी बाद से पलट गए थे। उन्होंने इस पर फख्र जताया था।
  • कल्याण सिंह ने कहा था, अधिकारियों का कर्मचारियों का किसी रूप में कहीं कोई दोष नहीं। कसूर नहीं, सारी जिम्मेदारी मैं अपने ऊपर लेता हूं। इस्तीफा देता हूं। किसी Court में कोई केस चलना है तो मेरे खिलाफ करो। किसी कमीशन में कोई इन्क्वायरी होनी है तो मेरे खिलाफ करो।
  • 2003: High Court ने 2003 में झगड़े वाली जगह पर खुदाई करवाई ताकि पता चल सके कि क्या वहां पर कोई राम मंदिर था।
  • 2005 में यहां आतंकवादी हमला हुआ। लेकिन आतंकवादी वहां कुछ नुकसान नहीं कर सके और मारे गए।
  • 30 सितंबर 2010 को Allahabad High Court की लखनऊ खंडपीठ ने आदेश पारित कर अयोध्या में विवादित जमीन को राम लला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बांटने का निर्णय किया जिसे सबने Supreme court में चैलेंज किया है।
  • 8 मार्च 2019 को Supreme court ने इस मामले को बातचीत से सुलझाने का निर्णय किया और इसके लिए तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति का गठन कर दिया। इस समिति के अध्यक्ष जस्टिस खलीफुल्ला, श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू शामिल हैं।

Ayodhya Vivad Par Supreme Court Ka Faisla

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला शनिवार सुनायेगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ( CJI Ranjan Gogoi ) जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की 5 सदस्यीय बेंच शनिवार की सुबह साढ़े दस बजे यह निर्णय सुनाएगी। क्या होगा अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला।

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